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Shayari sangrah

अब दूर रहना मुमकिन नहीं होगा हर वक्त ख्वाबों खयालों में रहने लगी हो आजकल मेरी धड़कन कह रही है तुम्हारे प्यार के बगैर जीना गवारा नहीं होगा ख्वाहिशों की तरह प्यार मिलने लगा है कोई कमी महसूस नहीं होती है खुशनसीब हूं जो बेतहाशा प्यार करती हो तन्हा सी जिंदगी जन्नत बना दिया जबसे प्यार मिलने लगा है खुशियों की महफिल सजने लगी है सभी मुश्किलें खत्म हो गई है जिंदगी सवरने लगी है मैंने बहुत इंतजार किया है तुम मेरे इरादों को समझ जाओगी दिल की हर तमन्ना पूरी हो जाएगी जब हमसफर बन जाओगी आजकल इशारों में प्यार का इजहार होने लगा है मन के ख्वाहिशों का काम होने लगा है सब फिक्र छोड़कर, उसके इश्क में जीने लगा हूं Hindi shayari 1.  शायरी संग्रह मनोज कुमार गोरखपुर  2.  Shayari sangrah 3.  शायरी मनोरंजन  4.  Shayari sangrah  5.  shayari 6.  shayari manoj kumar gorakhpur  7.  Shayari 8.  शायरी मनोज कुमार गोरखपुर  9.  MAST SHAYARI 10.  शायरी संग्रह  11.  हिंदी विशाल शायरी संग्रह  12.  कविता 13.  SHAYARI INDIA ...

मेरे सिवा किसी और से प्यार करने लगोगी

मेरे सिवा किसी और से प्यार करने लगोगी मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा कैसे समझाऊं तुम जान हो मेरी यह सच कह रहा हूं जिंदा ना रह पाऊंगा

न जाने क्यों मुझसे नफरत करने लगी है

न जाने क्यों मुझसे नफरत करने लगी है उसकी तीखी बात को सुनकर निराश हो जाता हूं आजकल उसके बदले हुए रूप को देखता हूं भरोसा नहीं होता उसको क्या हो गया है

मैं चढ़ता रहा मोहब्बत की सीढ़ियों से

मैं चढ़ता रहा मोहब्बत की सीढ़ियों से मंजिल कितनी दूर है आज तक समझ नहीं पाया वह इशारे कर के बुलाती  रही यूं ही चलते चलते वर्षों गुजर गया मंजिल कितनी दूर है आज तक समझ नहीं पाया

मेरे दिल के चप्पे-चप्पे पर रहता है

मेरे दिल के चप्पे-चप्पे पर रहता है उनका पहरा कभी बिगड़ना चाहूं तो उनके डर से मैं लौट जाता हूं क्या बतलाए यार अपने घर की रूखी सूखी खाते है