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मेरे दिल के चप्पे-चप्पे पर रहता है

मेरे दिल के चप्पे-चप्पे पर रहता है उनका पहरा कभी बिगड़ना चाहूं तो उनके डर से मैं लौट जाता हूं क्या बतलाए यार अपने घर की रूखी सूखी खाते है